PMAY फर्जी वेबसाइट और ठगी से कैसे बचें

लेखक: Sarkari Jankari Guide | अंतिम अपडेट: 15 अक्टूबर 2026

PM Awas fraud के मामले हर साल बढ़ते हैं, क्योंकि करोड़ों लोग इस योजना से उम्मीद रखते हैं और ठग इसी उम्मीद का फायदा उठाते हैं। फर्जी वेबसाइट, “रजिस्ट्रेशन फीस” वाले कॉल, नकली ऐप और “नाम जुड़वाने” वाले दलाल, ये सब मिलकर गरीब परिवारों से पैसे और निजी जानकारी लूटते हैं। इस लेख में हम ठगी के सबसे आम तरीके, असली सरकारी पोर्टल की पहचान, सुरक्षित रहने के नियम और ठगी होने पर शिकायत की प्रक्रिया बता रहे हैं।

ध्यान दें: यह वेबसाइट भी सरकारी नहीं है। हम कोई फॉर्म नहीं भरते, कोई फीस नहीं लेते और आपसे OTP या बैंक जानकारी कभी नहीं मांगते।

PM Awas fraud के 6 आम तरीके

तरीकाठग क्या कहता हैसच
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फर्जी वेबसाइट“यहां ₹500 देकर PM Awas रजिस्ट्रेशन करें”आवेदन/सर्वे मुफ्त है
फोन कॉल“आपका घर स्वीकृत है, प्रोसेसिंग फीस भेजें”सरकार कभी फोन पर फीस नहीं मांगती
नकली ऐप“PM Awas App डाउनलोड करें, आधार डालें”केवल मंत्रालय के ऐप भरोसेमंद हैं
दलाल“₹10,000 दो, सूची में नाम ऊपर करवा दूंगा”सूची सर्वे डेटा और ग्राम सभा से बनती है
व्हाट्सऐप लिंक“नई सूची PDF, यहां क्लिक करें”लिंक से फोन में मालवेयर आ सकता है
किस्त के नाम पर“किस्त रिलीज़ के लिए OTP बताएं”OTP बताते ही खाता खाली हो सकता है

असली पोर्टल पहचानने के 7 तरीके

  1. डोमेन देखें: सरकारी पोर्टल .gov.in या .nic.in पर ही होते हैं, जैसे pmayg.nic.in, rhreporting.nic.in, pmay-urban.gov.in, pmaymis.gov.in।
  2. मिलते-जुलते नाम से सावधान: “pmay-gov.in”, “pmawas-online.com” जैसे नाम सरकारी नहीं हैं।
  3. फीस: किसी भी पेज पर आवेदन के लिए पैसे मांगे जाएं तो वह फर्जी है।
  4. https और ताला: यह जरूरी है पर काफी नहीं। फर्जी साइट पर भी ताला हो सकता है।
  5. संपर्क जानकारी: सरकारी पोर्टल पर मंत्रालय का नाम और सरकारी ईमेल (@nic.in/@gov.in) होता है।
  6. ऐप का डेवलपर: Play Store पर डेवलपर का नाम मंत्रालय/NIC/UIDAI होना चाहिए।
  7. जानकारी की मांग: ATM PIN, CVV या पूरा बैंक पासवर्ड कोई सरकारी पोर्टल नहीं मांगता।

ग्रामीण लाभार्थी का स्टेटस देखने का असली पेज PMAY-G लाभार्थी खोज पेज है। तरीका PMAYG Status कैसे चेक करें में है।

ठगी से बचने के 8 नियम

  • OTP किसी को न बताएं, चाहे वह खुद को अधिकारी बताए।
  • आधार की फोटोकॉपी पर उद्देश्य और तारीख लिखें।
  • पासबुक या ATM कार्ड किसी को न दें।
  • “नाम जुड़वाने” या “किस्त जल्दी दिलाने” के लिए नकद न दें।
  • अनजान लिंक या APK फाइल डाउनलोड न करें।
  • पंचायत की ग्राम सभा में ही सूची की पुष्टि करें।
  • अपने खाते के SMS अलर्ट चालू रखें।
  • संदेह हो तो सीधे पंचायत सचिव या BDO कार्यालय से पूछें।

सर्वे के समय होने वाली ठगी

AwaasPlus सर्वे के दौरान कुछ लोग खुद को सर्वेयर बताकर घर-घर जाते हैं और “सर्वे फीस” मांगते हैं। असली सर्वेयर के पास पंचायत/ब्लॉक का पहचान पत्र होता है और सर्वे मुफ्त होता है। सर्वेयर से नाम पूछें और पंचायत सचिव से पुष्टि करें। सर्वे की असली प्रक्रिया AwaasPlus Self Survey गाइड में पढ़ें।

ठगी हो जाए तो तुरंत क्या करें

स्थितिक्या करेंकहाँ
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पैसे ऑनलाइन चले गएतुरंत कॉल करें, ट्रांजैक्शन ID तैयार रखेंसाइबर हेल्पलाइन 1930
ऑनलाइन शिकायतपूरी जानकारी और स्क्रीनशॉट के साथcybercrime.gov.in
बैंक खाताडेबिट/UPI ब्लॉक करवाएंअपनी बैंक शाखा/हेल्पलाइन
दलाल ने नकद लियालिखित शिकायतथाना और BDO कार्यालय
आधार दुरुपयोग का डरबायोमेट्रिक लॉक करेंmAadhaar ऐप/UIDAI

ठगी के बाद पहले 1–2 घंटे सबसे कीमती होते हैं। जितनी जल्दी 1930 पर शिकायत होगी, पैसा रोकने की संभावना उतनी ज्यादा होगी।

योजना से जुड़ी असली शिकायत कहाँ करें

अगर समस्या ठगी की नहीं बल्कि योजना की है, जैसे किस्त रुकना, गलत नाम कटना या पंचायत में पैसे मांगना, तो PMAY-G शिकायत गाइड में बताए गए रास्ते अपनाएं। किस्त की समस्या के लिए किस्त अटक गई: DBT समाधान देखें।

परिवार के बुजुर्गों को कैसे समझाएं

गांव में ज्यादातर ठगी बुजुर्गों और कम पढ़े-लिखे लाभार्थियों के साथ होती है। उन्हें एक सीधी बात याद करवा दें: “आवास योजना में कोई फीस नहीं लगती, और OTP किसी को नहीं बताना।” फोन के पास एक कागज पर 1930 और पंचायत सचिव का नंबर लिखकर रख दें।

उदाहरण: एक असली मामला कैसे पहचाना गया

एक लाभार्थी को कॉल आया कि “आपकी दूसरी किस्त ₹70,000 रुकी है, ₹1,500 GST भरें”। कॉल करने वाले ने लाभार्थी का नाम और गांव सही बताया, इसलिए भरोसा हो गया। पर लाभार्थी के बेटे ने PMAY-G लाभार्थी पेज पर स्टेटस देखा तो दूसरी किस्त का FTO पहले ही बन चुका था और पैसा दो दिन में खाते में आ गया। सीख यह है कि ठग सार्वजनिक सूची से नाम निकालकर भरोसा जीतते हैं। स्टेटस खुद देखें और कभी पैसा न भेजें।

नकली संदेशों के उदाहरण और पहचान

संदेशपहचान का संकेत
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“PM Awas की नई लिस्ट जारी, नाम देखने के लिए यह APK डाउनलोड करें”सूची वेबसाइट पर देखी जाती है, APK की जरूरत नहीं
“आपको ₹2.5 लाख स्वीकृत, ₹999 प्रोसेसिंग फीस भरें”कोई फीस नहीं, राशि भी योजना से मेल नहीं खाती
“आधार अपडेट न करने पर घर रद्द, लिंक पर क्लिक करें”धमकी भरी भाषा ठगी का आम संकेत
“सरपंच के कहने पर ₹5,000 जमा करें, नाम पक्का”सूची ग्राम सभा और डेटा से बनती है, पैसे से नहीं

ऐसे संदेश परिवार या गांव के व्हाट्सऐप ग्रुप में आएं तो आगे न भेजें और सबको सावधान करें।

कियोस्क और साइबर कैफे में सावधानी

कई लोग कियोस्क पर फॉर्म भरवाते हैं। वहां ये बातें ध्यान रखें:

  • काम आपकी आंखों के सामने हो और OTP आप खुद डालें।
  • रसीद लें, जिसमें सेवा शुल्क लिखा हो।
  • कोई आपका आधार या फोटो अपने फोन में न खींचे।
  • काम पूरा होने पर पोर्टल से लॉगआउट करवाएं।

पंचायत स्तर पर दलाली की पहचान

अगर कोई व्यक्ति कहे कि उसकी “ऊपर तक पहुंच” है, या वह किस्त का कुछ हिस्सा मांगे, तो यह दलाली है। असली कर्मचारी किसी भी चरण पर पैसे नहीं मांगते। ऐसे व्यक्ति का नाम और तारीख लिखकर BDO को शिकायत करें।

ठगी की सूचना दूसरों तक कैसे पहुंचाएं

अगर आपके गांव में किसी के साथ ठगी हुई है, तो ग्राम सभा में इसकी जानकारी दें, ताकि बाकी लोग सावधान रहें। पंचायत भवन पर “आवास योजना में कोई फीस नहीं, OTP किसी को न बताएं, साइबर हेल्पलाइन 1930” लिखवाना छोटा पर असरदार कदम है। स्कूल के बच्चे भी घर के बुजुर्गों को यह संदेश समझा सकते हैं।

याद रखने लायक एक लाइन

आवास योजना में आवेदन, सर्वे, स्टेटस और सूची, सब मुफ्त हैं। पैसे मांगने वाला हर व्यक्ति, चाहे वह खुद को कुछ भी बताए, शक के घेरे में है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

PM Awas में रजिस्ट्रेशन फीस लगती है?

नहीं। ग्रामीण सर्वे और शहरी ऑनलाइन आवेदन, दोनों मुफ्त हैं।

PM Awas fraud की शिकायत कहाँ करें?

ऑनलाइन ठगी के लिए 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें। दलाली के लिए BDO और थाने में लिखित शिकायत दें।

क्या सरकार फोन करके किस्त की जानकारी देती है?

आमतौर पर SMS से सूचना आती है। फोन पर कोई फीस या OTP मांगे तो वह ठगी है।

असली PM Awas ऐप कौन-सा है?

ग्रामीण के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय का AwaasApp/AwaasPlus और शहरी के लिए आवास मंत्रालय का PMAY(U) ऐप। डेवलपर का नाम जरूर जांचें।

हमने कैसे जांचा

यह गाइड साइबर अपराध पोर्टल की सलाह, सरकारी आवास पोर्टलों के डोमेन और लाभार्थियों से रिपोर्ट होने वाले आम ठगी पैटर्न के आधार पर तैयार की गई है। उदाहरण पहचान छिपाकर लिखा गया है। अंतिम समीक्षा: 15 अक्टूबर 2026।